सच्चे दरबार की जय, जय शिव गुरु, मनुष्य को अपने कल्याण का उद्देश्य हो तो वह सांसारिक रूप से तर जाता है, लोगों को चाहिए समता की दृष्टि रखें, परमात्मा शिव गुरु की का आकार चाहे जैसा हो सबको प्राप्त करने का अधिकार है, साधक को चाहिए बुद्धि को स्थिर बनावे, भूख लगा आन और प्यास ला का पानी जरूर देना चाहिए, जिंदगी एक खेल है अब तुम ही निर्णय लेना है कि तुम्हें तुम्हें खिलाड़ी बनना है या खिलौना
सच्चे दरबार की जय, जय शिव गुरु, मनुष्य को अपने कल्याण का उद्देश्य हो तो वह सांसारिक रूप से तर जाता है, लोगों को चाहिए समता की दृष्टि रखें, परमात्मा शिव गुरु की का आकार चाहे जैसा हो सबको प्राप्त करने का अधिकार है, साधक को चाहिए बुद्धि को स्थिर बनावे, भूख लगा आन और प्यास ला का पानी जरूर देना चाहिए, जिंदगी एक खेल है अब तुम ही निर्णय लेना है कि तुम्हें तुम्हें खिलाड़ी बनना है या खिलौना


