श्री कृष्ण धर्म


भगवान अपने 
भक्तों पर बड़े ही दयालु होते हैं भक्तों की रक्षा करने के लिए और दोस्तों को नाश करने के लिए समय-समय पर अवतरित होते रहते हैं वह हरि अनंत हैं उनकी कथा भी अनंत है और जीवन की यात्रा भी अनंत मृत्यु केवल पड़ाव है इसलिए भगवान जन्म मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए हर हमेशा के लिए अपनी सगी बंधु बांधव सभी से अपने आप पर विजय पाकर अपनी अपनी धुंधले  वातावरण को साफ रखने की इशारे करते हैं और जन्म मृत्यु मात्र केवल चक्र है या कहें वह मात्र एक पड़ाव है वह जीवन का अंतिम घड़ी नहीं है उसे जन्म मृत्यु से आगे और भी जाना है और यह अनंत दूरी आगे चलते जाता है इसलिए महाभारत आवश्यक था क्योंकि लोग अपना मुंह नहीं भंग कर पता है वह पिता पुत्र और भाई नाइट में सिमट कर रह जाता है जिस कारण से लोगों को दुख होता है और वह साफ तौर पर रहते हैं जो दुख दे वह अपना नहीं हो सकता है इसलिए इस मुंह के बंधन को तोड़ना सीखो और मोछ और मुक्ति की वह मैं सब कुछ प्रदान करूंगा जो तुम बाहर की सारी दुनिया में खोज रहे हो जब मैं हर जगह तुम्हें मैं ही मैं देखूं मेरे अलावा कुछ और नहीं तब मैं यह समझ लूं की अगर तेरे भक्ति में प्रेम और श्रद्धा विश्वास सागर जाग उठे तो तुम सारे धर्म को त्याग कर मेरे ही चरणों में ली हो जाओ और मैं तेरा उद्धार कर दूंगा और तुम्हें उत्तम गति प्राप्त होगी फिर हम लोग जहां जाने के बाद फिर से आना नहीं होता है लेकिन यहां रहने के बाद तुम्हें जन्म मृत्यु के चक्कर में ठीक हर प्रकार की तरह इस तरीका से तुम घूमता रहेगा और तुम्हें यहां कभी सुखी नहीं मिलेगा यही बात भगवान श्री कृष्णा अर्जुन को महाभारत काल में बताते हैं हालांकि यह देखा जाए तो यह एक महाभारत महाकाव्य है जबकि रामायण काव्य है परंतु इसे इस दृश्य को हकीकत में बदलने का भी प्रयास भी किया गया है और यह भी देखा जाता है की यह जो रचना हुई है यह लागू भी होती है सत प्रतिशत हम लोगों पर इसका बहुत गहरा असर पड़ता है इसलिए धर्म को ध्यान में रखते ही हुए ही कर्तव्य को करना चाहिए बिना धर्म को ध्यान में रखते हुए कोई कर्तव्य कर्तव्य शुद्ध नहीं हो सकता जय श्री कृष्णा

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