शिव चर्चा में शामिल शिव शिष्य एवन शिस्याओं ने शामिल होकर अपनी गुरु महादेव की चर्चा शिव प्रांगण में रखा गया जो की प्रत्येक सोमवार साप्ताहिक चर्चा किए जाते हैं जिसमें हमने भी शिव चर्चा का आनंद लेते हुए शिव परिचर्चा शिव गुरु किर्पा से भाग लिए और भैया हरिंद्रानंद जी के दिए गए तीन सूत्रों का पालन करते हुए प्रथम सूत्र दया मांगने एवन दूसरे सूत्र के अनुरूप शिव गुरु महादेव आदि देव बाबा भोले शिव शंकर डमरूधारी के चर्चा का विषय रखा गया तथा अंतिम रूप से शिव चर्चा तीन सूत्रों में से अंतिम सूत्र के रूप में नमः शिवाय अर्थात शिव को बारंबार प्रणाम करना जिसे हम जैसे शिव भाई बहनों को 108 बार नमः शिव का जाप करना जिसे अगर समयानुसार प्रातः एवन सायं काल को किया जय तो यह बड़े ही लाभकारी सिद्ध होता है वैसे तो शिव चर्चा में कोई बंधन नहीं है आप इसे किसी समय या किसी जगह या कोई वेक्ति पुरुष या स्त्री कर सकता है इसमें कोई बंधन नहीं है इसमें जिसे आदि काल से परम पिता परमात्मा रूप में पूज रहे थे वही शिव परम पिता परमात्मा को गुरु रूप में मानकर चलना है क्योंकि पहले से शिव गुरु रूप में भी पूजे गए हैं क्योंकि मात्र कुछ समय पहले से कुछ लोगों के गलत अवधारणा के कारण शिव गुरु चर्चा बंद हो गई जिससे लोग मनमानी पर उतर गए और सारे जगत में कदाचार, भारस्ताचार का बोलबाला हो गया जिसका नतीजा यह है कि मां और बेटी बनता नहीं सास और पोतोहू में भी बनता इसी तरह से बाप और बेटे का रिश्ता में भी दरार हो गया गुरु और शिष्य के रिश्ते लांछन लग गया आज ऐसा समय आ गया की अगर गुरु ज्ञान दे को माता पिता को सदा आदर करना तो ऐसा देखा जाता की ऐसा पॉसिबल ही नहीं है तो पुत्र का यही जवाब रहेगा तो आप हमारा किया किया रास्ता दिखाएगा हम को खुद ही पता है कहने का तात्पर्य जैसा पुत्र पिता से बड़े हो और बाप बेचारा किया करे तो वह लाचार बस अपनी विबस्ता को कोसता रहता की मेरे बेटे नालायक निकल अर्थात निस्कर्स यह निकल पाता है कि धर्म लोग नाम का करते है यह सब यानी लोग दिखावा करते धर्म के नाम पर लोग लाखो और करोड़ों दान कर देंगे पर अगर पड़ोसी को जल अर्थात पानी का भी दिकत हो तो लोग यही जवाब देंगे की अपनी वेबस्था तुम कैसे करेगा सो तुम जानो इसलिए हे भाई ही बहन इतना कुरूर मत बनो की बाद में तुम्हे भी पछताना पड़े आगे अगले अध्याय में विस्तृत चर्चा करेंगे जय शिव गुरु नमः शिवाय, नमः शिवाय
