सादी विवाह का शुभ संयोग श्री परमात्मा के विधान अनुसार ही होता है

 सादी विवाह का शुभ संयोग श्री परमात्मा के विधान अनुसार ही होता है चाहे मनुष्य लाख प्रयास करें जिसका मिलना या बिछड़ना सब पहले से ही तय होता है इसी बात शास्त्र में भी बताया गया है कि छः प्रकार की बाते पहले से ही तय होता है जिसमे दो चार का वर्णन दिया जा रहा है जिसमे यह बताया जा रहा है कि यश अपयश यानी खियाती और कुख्यात होना लोगों को पहले से ही तय परमात्मा तय कर रखा है और ठिक इसी प्रकार से आगे यह भी बताया जाता है की लाभ या हानि भी परमात्मा ने पहले से ही तय कर रखा है इसका अर्थ तो यही हुआ की मनुष्य चाहे कितना ही परिश्रम क्यों न कर लें जितना लाभ होने या फिर जितना हानि होने का होगा उतना ही लाभ अथवा हानि होगा इसलिए सादी विवाह के प्रति अगर चर्चा किया जाए तो यह निष्कर्ष यह निकलता की शादी विवाह विवाह का यह प्रेम प्रणय का शुभ संयोग, शुभ मुहूर्त और यह शुभ समय पहले से ही तय होता है यद्धपि समाजिक तौर पर यह रिश्ता वर एवन बधु के माता पिता पारस्परिक विचार धाराओं के मेल मिलाप के अधीन यह रिश्ता कायम होता है लेकिन यह तो सामाजिक रिश्ता के प्रति केबल विवेचना हुआ लेकिन अगर हम इसके विपरित प्रेम विवाह के बात करें तो इसमें हम यह पाते की इसमें लड़कियों तथा लड़कों के शारीरिक और मानसिक संयोग के अनुरूप प्रेम विवाह माना गया है जिसमे लड़के लड़कियों को एक धार्मिक मंदिर में ले जाकर ही प्रभु समक्ष लड़के लड़कियों  को सिंदूर दान करता है जबकि सामाजिक विवाह में सादी विवाह में वर समेत बारात लेकर बधु पक्ष के यहां ठहराव कर सादी विवाह का कार्यक्रम एक मंडप के निकट  विधि पूर्वक ब्राह्मणों द्वारा सादी का कार्यक्रम पूरा करवाए जाते हैं और बारातियों के ठहराव के लिए बधू पक्ष की ओर से ठाठ बाट से खाने पीने की व्यवस्था किए जाते हैं लेकिन इसमें एक जटिल मुस्किल कार्य यह देखे जाते हैं कि इसमें वर पक्ष एवन बधु पक्ष की ओर से जो तिलक यानी दहेज की तय तमन्ना की जाती है अगर इसमें बधू पक्ष की ओर से कोई कमी रह जाए तो इसमें विवाद उत्पन हो जाता है जिस कारण से लडकियों को लड़कों द्वारा हमेशा के लिए जिंदगीभर के लिए ताना सुनना पड़ जाता जो की जिससे लड़कियों हमेशा के लिए अपने आप को कम आंकने लगती जबकि लड़कों ताना मारने में कोई कसर नहीं  छोड़ते लड़के तनिक भी यह नहीं सोचता की लड़की वाली कुछ देने वाले हैं जो की कन्या दान समेत आर्थिक बोझ भी उठाई है जो की आगे चलकर कर हमे भी इस रास्ता से गुजरना होगा इसलिए सामाजिक विवाह में एक प्रकार की खामियां अक्सर देखी जाती है लेकिन प्रेम विवाह में ऐसा नहीं है लेकिन इसमें भी एक डर देखा जाता है की जिस लड़के से प्यार या मुहब्बत करते हैं कहीं वह लड़का उसे छोड़ न दे लेकिन ऐसे लोगो में ही ऐसा देखा जाता जो युगल बराबरी वाले नहीं होते या फिर जो युवती कोई अनजान जिसे वह पुरी तरीका से न जानता हो ऐसे ही लोगों में ऐसा देखा जाता है परंतु कोई चिन्ता करने की कोई बात नही है अगर पूरे जानकारी और पूरे विश्वास के साथ किया जाय तो ये समस्या काफी कम देखा जायेगा परन्तु कभी कभी सामाजिक विवाह में भी दूरियां देखी जाती है लेकिन इसका भी मैं अपने गुरु किर्पा से समाधान बताता हूं अगर वेक्ति केवल लडके लड़कियों का विवाह समझकर विवाह न करे बल्कि दो सामाजिक परम्पराओं के मेल का नाम समझकर सादी का उचित निर्णय लें जो की आगे चलकर उसे कोई दीकातों का सामना झेलना न पड़े  जय शिव सती की किर्पा से लिखे गए अमृत वाणी जय शिव शम्भू गुरु महादेव  नमः शिवाय नमः शिवाय शिवाय 

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